Monday, 5 June 2017

जानिए जीवन में किस तरह के लोग सफलता पाते हैं..

मार्गदर्शक चिंतन-

चाणक्य ने बड़ी महत्वपूर्ण बात कही है जब तक तुम दौड़ने का साहस ना जुटाओगे तुम्हारे लिए जीतना बड़ा मुश्किल होगा। साहसी और प्रयोगधर्मी व्यक्ति को ही जीवन में बहुत कुछ मिला करता है। 
संसार में बहुत लोग असफल हो जाने के डर से प्रतिस्पर्धा में नही पड़ते। यह कहना कि प्रभु ने जो दिया है मै उसमें सन्तुष्ट हूँ। यह संतोष नहीं कमजोरी है, भय है, नकारात्मक संतोष है। अपने आप को विकसित करने से रोक देने जैसा है, फूल को खिलने से रोक देने जैसा है। 
मेहनत और कर्म करने में पूरे असंतोषी रहो। प्रयास की सात्विक सीमाओं तक पहुँचो। कर्म के बाद जितना मिले, जैसा मिले, जब मिले, जहाँ मिले उसमें संतोष रखो और प्रभु पर भरोसा रखो। कर्म जरूर करते रहो, जीवन में नए रास्ते घर बैठे नहीं मिलेंगे वो कर्म करते-करते नजर आयेंगे। भगवान् को कर्मशील भक्त ही प्रिय हैं।

Sunday, 4 June 2017

जीवन में पूर्णता कब आती है..

मार्गदर्शक चिंतन-

जिन्दगी में मन लगाना है तो प्रभु में ही लगाना। अन्यथा तुम अपूर्ण और अधूरे ही जियोगे और अधूरे ही जाओगे। ऐसा नहीं है कि आदमी पूर्ण होकर नहीं जी सकता। जी सकता है पर वह पूर्णता प्राप्त तो परमात्मा के संग से ही होगी।
परमात्मा के संग होने से असंभव भी संभव हो जाता है और संग ना होने से संभव भी असंभव हो जाता है। अर्जुन अकेला था तो उससे युद्ध में खड़ा होना भी मुश्किल हो रहा था। जब श्री कृष्ण के संग होने का अहसास हुआ तो पूरा मैदान जीत लिया। 
संग होने का अर्थ 24 घंटे राम-राम रटना या केवल मंदिर में जाना नहीं है। यह तो सारी दुनिया कर रही है। कौन आनन्द और पूर्णता को उपलब्ध हुआ ? भीतर ह्रदय में यह बैठ जाना कि श्री हरि ही मेरे अपने हैं संसार में बस। अर्जुन की तरह सारथि बनालो श्रीकृष्ण को , अपने आप मंजिल तक ले जायेंगे।

Saturday, 3 June 2017

दुनिया में सबसे अधिक बलवान कौन है..

मार्गदर्शक चिंतन-

दुनिया में सबसे अधिक कोई बलवान है तो वो है इच्छाशक्ति। दुनिया की हर चीज इसके माध्यम से तुम्हें मिल सकती है। चाह होगी तो राह अपने आप मिल जाएगी। वो हर चीज तुम्हें प्राप्त होती है जो तुम्हारे लिए जुनून बन जाती है। 
आगे बढ़ने की, महान बनने की , सफल होने की, कुछ अलग करने की इच्छा जरूर रखो। संसार के जितने भी साधन है वो मनुष्य के लिए ही बने हैं।
कमजोर को कुछ भी नहीं मिलता। साहसी को सब कुछ मिलता है। कायरता के अंधेरे से बाहरनिकलो, और आगे बढ़ने का सपना देखो, उसी को जियो। हर चीज तुम्हें प्राप्त होगी
मुसीबतों से ही उभरती है शख्सियत यारो।
जो चट्टानों से न उलझे वो झरना किस काम का॥

Thursday, 1 June 2017

कैसे हर व्यक्ति का जीवन है खास..

मार्गदर्शक चिंतन-

संसार में सभी जीव पात्र और अधिकारी हैं। परमात्मा के अंश होने के कारण अयोग्य तो कोई है ही नहीं। लेकिन पात्र की भी तो समय-समय पर सफाई आवश्यक है। कुछ ने अपने पात्र को इतना गंदा कर लिया है अमृत भी डालोगे तो विष हो जायेगा। 
कंकड- पत्थर इतने भर रखे हैं कि हीरे जवाहरात प्रवेश ही नही कर पा रहे। कंकड़ - पत्थरों को बाहर फेंको। हमारे पास पात्र तो है पर गंदे पात्र हैं। जन्म- जन्म से पात्र में कुविचारों की , वासना की , गलत कर्मों की गंदगी लिए बैठे हैं। उसे उलीचो बस, साफ़ करो। 
कथा और संत आश्रय से व नाम सुमिरन से मन को रोज साफ़ करते रहो , ताकि गंदगी मजबूत ना हो। आत्म-कल्याण और सत्य की प्राप्ति हेतु एक ही शर्त है बस, निष्कपट, निर्दोष, निर्वैर , निष्कलंक , सहज और सर्व हिताय का चिन्तन रखना। तुम्हारा पात्र साफ़ हुआ कि परमात्मा स्वयं आ जायेंगे।

Wednesday, 31 May 2017

जानिए क्या है जीवन में अशांति का कारण..

मार्गदर्शक चिंतन-

सत्य को जानने की पहली शर्त है खुद को जान लेना। खुद को जाने बिना परम की यात्रा हो ही ना पायेगी। खुद को जानने का अर्थ है (अन्तर्मुखी) हो जाना, माने - अपने भीतर झाँकना। सदियों से इंसान बहिर्मुखी जीवन ही जीता जा रहा है। 
इंसान को सबके दोषों के बारे में खबर है पर आश्चर्य है कि ना तो उसे खुद के दोषों के बारे में पता है और ना ही वह जानने को उत्सुक है। तुम जगत में किसी को भी जानने का प्रयत्न मत करो बस खुद को जानो। अशांति - विषाद का कारण ही यही है कि भीतर गंदगी भरी पड़ी है और तुमने दूर करने का प्रयत्न भी नहीं किया है। 
भीतर की पवित्रता ही परमात्मा की प्राप्ति की दिशा है। याद रखना जो भी परमात्मा की दिशा के प्रतिकूल जाता है वह एक दिन नष्ट हो जाता है। जो भी परमात्मा की और बढ़ता है वह आनन्द की अनुभूतियाँ, आंतरिक सौन्दर्य और अमृत से पूरी तरह भर जाता है। अन्तर्मुखी साधक को ही सत्य उपलब्ध होता है।

Tuesday, 30 May 2017

जानिए..जिंदगी में सबसे मुश्किल क्या है...

मार्गदर्शक चिंतन-

यक्ष गीता में युधिष्ठर से यक्ष ने एक प्रश्न किया है कि दुनिया में सबसे मुश्किल क्या है ? धर्मराज ने बड़ा सुन्दर जबाब दिया है कि सबसे मुश्किल है किसी भी कार्य को प्रारम्भ कर देना। 
शुरुआत करना ही सबसे मुश्किल है। आप दृढ संकल्प के साथ जब खड़े हो जाते हो तो आधा कार्य तो समझो तभी हो जाता है। आदमी बिचारता बहुत है। कार्य में तो 5% ऊर्जा ही लगती है, 95% तो सोचने में और प्लानिंग करने में लग जाती है। कर्म करते समय ही तो पता चलेगा कि और क्या-क्या सुधार किया जा सकता है नए कार्य करो लेकिन समय वद्धता जरूर रखो। कब तक कार्य को पूरा करना है। नहीं तो इतने कार्य पैंडिंग हो जायेंगे कि फिर कोई भी कार्य ढंग से नहीं हो पायेगा। क्रिया से आदमी उतना नहीं थकता जितना ये बिचार करके थक जाता है कि उसे क्या-क्या करना है।
जिन्दगी मिली थी कुछ करने के लिए।
लोगों ने सोचने में ही गुजार दी॥

एक ज़िन्दगी अमल के लिए भी नसीब हो।
ये ज़िन्दगी तो नेक इरादे में कट गई ॥

Monday, 29 May 2017

जानिए कितनी शक्ति होती है इंसान में..

मार्गदर्शक चिंतन-

क्या आपको पता है कि आपके भीतर कितनी शक्ति, कितनी सामर्थ्य छिपी पढ़ी है। दुनिया की कोई भी मशीन आज तक नहीं जान पाई। अपनी शक्ति का एक क्षुद्र भाग ही अभी तक आप प्रगट कर पाए हो।
इन्सान के पास जितनी शक्ति , जितने बिचार , जितने नये सृजन करने की सामर्थ्य बिद्यमान है वह अन्य किसी भी जीव के पास नहीं है। सैकड़ों बार आप असफल या चोट खा सकते हो लेकिन स्वयं में और ईश्वर में विश्वास रखने के कारण आप संसार को जरूर कुछ देने में सफल होंगे। 
समाज को कुछ ऐसे मनुष्यों की आवश्यकता है जो परमार्थ के यज्ञ में निरन्तर संलग्न रहकर इस समाज का भला कर सकें। जब तुम कहते हो मै क्या कर सकता हूँ ? तब तुम भगवान् का भी उपहास उड़ाते हो।
कुछ भी तो ऐसा नहीं जो तुम्हारे द्वारा ना हो सके। दृढ इच्छा की और अपनी शक्तियों को पहचानने की जरूरत है बस।