Thursday, 8 June 2017

जानिए क्या है धर्म...

मार्गदर्शक चिंतन-

धर्म से ही व्यक्ति का कल्याण होता है। धर्म ही व्यक्ति का उत्थान करता है। धर्म ही धारण करने योग्य है। धर्म के मार्ग से अर्थ -काम प्राप्त हो तो अंत में मोक्ष जरूर प्राप्त होता है। 
धर्म का परलोक की चिंता में होना बड़ा खतरनाक हुआ है, इसके दुष्परिणाम सामने हैं। लोग सोचते हैं जीवन अभी के लिए है धर्म कल के लिए। नहीं, धर्म इसी जीवन को विकारमुक्त, विषादमुक्त, भयमुक्त, चिन्तामुक्त, पापमुक्त बनाने के लिए है। 
ईश्वर के सामने 15 मिनट पूजा करना ही धर्म नहीं है अपितु सबके साथ सद व्यवहार करना और दूसरों के जीवन में प्रसन्नता का कारण बनना भी धर्म है। धर्म माने - प्रत्येक कर्म को सावधानी पूर्वक करना।

Wednesday, 7 June 2017

जानिए जीवन में कैसे सुखी रहा जा सकता है..

मार्गदर्शक चिंतन-

भोगी के लिए वन में भी भय है और योगी के लिए घर में भी वन जैसा आनंद है। जिसका मन विकार मुक्त हो चुका है वो हर जगह , हर घड़ी आनन्द अनुभव करता है। जैसे पतंग उड़ाने वाला आकाश में बहुत ऊपर तक पतंग ले जाता है पर डोरी अपने हाथ में रखता है 
थोड़ी सी भी उलझने पर पतंग को वापिस अपने पास खींच लेता है। भगवान् श्री कृष्ण अर्जुन को गीता में कहते हैं कि वैसे ही जो पुरुष विवेक रुपी डोर से इन्द्रियों रुपी पतंग को वश में करके अनासक्त होकर कर्म करता है, वह कभी भी नहीं उलझता। 
आसक्ति भाव से किये जाने वाले कर्म ही दुःख का कारण बनते हैं। दुःख वाहर से प्रगट नहीं होता , वह भीतर से प्रगट होता है। समस्या बाहर नहीं भीतर है। समाधान भीतर ही मिलेगा, जब भी मिलेगा। अपने मन को समझाकर ही सुखी हुआ जा सकता है।

Tuesday, 6 June 2017

जीवन में हर दिन हर पल कर्महीन जीवन मत जियो..

मार्गदर्शक चिंतन-

एक क्षण के लिए भी कर्महीन जीवन मत जियो कुछ कर्म अपने जीवन को आगे बढ़ाने के लिए करो। कुछ कर्म अपनों को आगे बढ़ाने के लिए करो। और कुछ कर्म समाज के लिए करो , ये कर्म सत्कर्म कहलाते हैं। 
किसी-किसी दिन कर्महीन रहने पर तुम्हें पता है कि कितनी नई चीजें सृष्टि में आगे बढ़ जाती है। कई नए बीज मिटटी में मिलकर अंकुरित होकर पेड़ बनने की और बढ़ जाते हैं। कई फूल काँटों के बीच रहकर प्रकृति को सौन्दर्य युक्त बनाने के लिए खिल पड़ते है। 
कई परमार्थी चित्त आत्म- प्रेरित होकर स्वार्थ की बेड़ियों को तोड़कर परमार्थ पर चल पड़े होंगे। कई हृदयों के तारों पर ईस्वर भक्ति का संगीत झंकृत हो चुका होगा। कई मानव देव बनने की राह पर चल पड़े होंगे। 
मै कई बार सोचता हूँ कि आपने और मैंने जीवन का एक महत्वपूर्ण दिन और क्षण फिर नष्ट कर दिया। आलस्य की शैया पर पड़े-पड़े समय को आज अपने हाथों से और आपके हाथों से फिर निकलता हुआ देख रहा हूँ।

Monday, 5 June 2017

जानिए जीवन में किस तरह के लोग सफलता पाते हैं..

मार्गदर्शक चिंतन-

चाणक्य ने बड़ी महत्वपूर्ण बात कही है जब तक तुम दौड़ने का साहस ना जुटाओगे तुम्हारे लिए जीतना बड़ा मुश्किल होगा। साहसी और प्रयोगधर्मी व्यक्ति को ही जीवन में बहुत कुछ मिला करता है। 
संसार में बहुत लोग असफल हो जाने के डर से प्रतिस्पर्धा में नही पड़ते। यह कहना कि प्रभु ने जो दिया है मै उसमें सन्तुष्ट हूँ। यह संतोष नहीं कमजोरी है, भय है, नकारात्मक संतोष है। अपने आप को विकसित करने से रोक देने जैसा है, फूल को खिलने से रोक देने जैसा है। 
मेहनत और कर्म करने में पूरे असंतोषी रहो। प्रयास की सात्विक सीमाओं तक पहुँचो। कर्म के बाद जितना मिले, जैसा मिले, जब मिले, जहाँ मिले उसमें संतोष रखो और प्रभु पर भरोसा रखो। कर्म जरूर करते रहो, जीवन में नए रास्ते घर बैठे नहीं मिलेंगे वो कर्म करते-करते नजर आयेंगे। भगवान् को कर्मशील भक्त ही प्रिय हैं।

Sunday, 4 June 2017

जीवन में पूर्णता कब आती है..

मार्गदर्शक चिंतन-

जिन्दगी में मन लगाना है तो प्रभु में ही लगाना। अन्यथा तुम अपूर्ण और अधूरे ही जियोगे और अधूरे ही जाओगे। ऐसा नहीं है कि आदमी पूर्ण होकर नहीं जी सकता। जी सकता है पर वह पूर्णता प्राप्त तो परमात्मा के संग से ही होगी।
परमात्मा के संग होने से असंभव भी संभव हो जाता है और संग ना होने से संभव भी असंभव हो जाता है। अर्जुन अकेला था तो उससे युद्ध में खड़ा होना भी मुश्किल हो रहा था। जब श्री कृष्ण के संग होने का अहसास हुआ तो पूरा मैदान जीत लिया। 
संग होने का अर्थ 24 घंटे राम-राम रटना या केवल मंदिर में जाना नहीं है। यह तो सारी दुनिया कर रही है। कौन आनन्द और पूर्णता को उपलब्ध हुआ ? भीतर ह्रदय में यह बैठ जाना कि श्री हरि ही मेरे अपने हैं संसार में बस। अर्जुन की तरह सारथि बनालो श्रीकृष्ण को , अपने आप मंजिल तक ले जायेंगे।

Saturday, 3 June 2017

दुनिया में सबसे अधिक बलवान कौन है..

मार्गदर्शक चिंतन-

दुनिया में सबसे अधिक कोई बलवान है तो वो है इच्छाशक्ति। दुनिया की हर चीज इसके माध्यम से तुम्हें मिल सकती है। चाह होगी तो राह अपने आप मिल जाएगी। वो हर चीज तुम्हें प्राप्त होती है जो तुम्हारे लिए जुनून बन जाती है। 
आगे बढ़ने की, महान बनने की , सफल होने की, कुछ अलग करने की इच्छा जरूर रखो। संसार के जितने भी साधन है वो मनुष्य के लिए ही बने हैं।
कमजोर को कुछ भी नहीं मिलता। साहसी को सब कुछ मिलता है। कायरता के अंधेरे से बाहरनिकलो, और आगे बढ़ने का सपना देखो, उसी को जियो। हर चीज तुम्हें प्राप्त होगी
मुसीबतों से ही उभरती है शख्सियत यारो।
जो चट्टानों से न उलझे वो झरना किस काम का॥

Thursday, 1 June 2017

कैसे हर व्यक्ति का जीवन है खास..

मार्गदर्शक चिंतन-

संसार में सभी जीव पात्र और अधिकारी हैं। परमात्मा के अंश होने के कारण अयोग्य तो कोई है ही नहीं। लेकिन पात्र की भी तो समय-समय पर सफाई आवश्यक है। कुछ ने अपने पात्र को इतना गंदा कर लिया है अमृत भी डालोगे तो विष हो जायेगा। 
कंकड- पत्थर इतने भर रखे हैं कि हीरे जवाहरात प्रवेश ही नही कर पा रहे। कंकड़ - पत्थरों को बाहर फेंको। हमारे पास पात्र तो है पर गंदे पात्र हैं। जन्म- जन्म से पात्र में कुविचारों की , वासना की , गलत कर्मों की गंदगी लिए बैठे हैं। उसे उलीचो बस, साफ़ करो। 
कथा और संत आश्रय से व नाम सुमिरन से मन को रोज साफ़ करते रहो , ताकि गंदगी मजबूत ना हो। आत्म-कल्याण और सत्य की प्राप्ति हेतु एक ही शर्त है बस, निष्कपट, निर्दोष, निर्वैर , निष्कलंक , सहज और सर्व हिताय का चिन्तन रखना। तुम्हारा पात्र साफ़ हुआ कि परमात्मा स्वयं आ जायेंगे।