Tuesday, 28 November 2017

कैसा है सत्य पर चलने का मार्ग..

मार्गदर्शक चिंतन-

सत्य का अर्थ शांति का मार्ग नहीं शाश्वत का मार्ग है। जिसे सुख और शांति की चाहना है, वह भूलकर भी सत्य का वरण नहीं कर सकता क्योंकि सत्य का मार्ग अवश्य ही एक राजपथ है मगर ऐसा राजपथ, जिसमे पग-पग पर विरोध और अवरोध के नुकीले काँटों की भरमार है।
एक बात और जिसके जीवन में मान और सम्मान की इच्छा हो उसके लिए सत्य का मार्ग सदैव बंद ही समझो क्योंकि एक सत्य के पथिक को पग - पग पर अपमान व सामाजिक व्यंग्य के सिवाय और मिलता ही क्या है ?जिसे मीरा की तरह जहर पीना और कबीर की तरह कटुता में जीना आ गया, वही सत्य के मार्ग का सच्चा पथिक है और उसी को निश्चित ही शाश्वत की उपलब्धि भी है। अतः शाश्वत तक पहुँचाने वाले मार्ग का नाम ही तो सत्य है।

Monday, 27 November 2017

जानिए जीवन जीने का एक सुंदर उपाय...

मार्गदर्शक चिंतन-

जीवन को केवल तमन्ना में ही मत जिओ अपितु इसे तन्मयता के साथ जीने की आदत भी बनाओ। जो लोग केवल तमन्नाओं में जिया करते हैं यह जिन्दगी उनकी नासमझी पर हंसा करती है। एक इच्छा पूरी नहीं हुई कि उससे पहले और अनेक इच्छाओं का जन्म होना ही तमन्ना में जीना है।
तन्मयता में जीना अर्थात अपने द्वारा संपन्न प्रत्येक कार्य को पूर्ण निष्ठा के साथ सावधानी पूर्वक इस प्रकार करना कि कर्म ही पूजा और आत्म संतुष्टि ही परिणाम बन जाए।
तन्मयता के कारण ही एकलव्य अर्जुन से भी आगे निकल गया और केवल तमन्ना के कारण ही दुर्योधन को कुलनाशक होना पड़ा। अतः तमन्ना नाश का कारण और तन्मयता ही जीवन के विकास का कारण है।

Sunday, 26 November 2017

दूसरों के दोषों को देखने से पहले अपने आपको देखें..

मार्गदर्शक चिंतन-

चाहे गलती कोई भी हो और किसी की भी हो मगर दूसरों को दोष देना, यही आज के इस आदमी की फितरत बन गयी है। आदमी गिरता है तो पत्थर को दोष देता है, डूबता है तो पानी को दोष देता है और कुछ नहीं कर पाता तो क़िस्मत को दोष देता है।
दूसरों को दोष देने का अर्थ ही मात्र इतना सा है कि स्वयं की गलती को स्वीकार करने का सामर्थ्य न रख पाना और अपने में सुधार की भावी संभावनाओं को स्वयं अपने हाथों से कुचल देना।
खुद के जीवन में दोष होने से भी ज्यादा घातक है दूसरों को दोष देना क्योंकि इसमें समय का अपव्यय व आत्मप्रवंचना दोनों होते हैं। अतः आत्मसुधार का प्रयास करो, जहाँ आत्म सुधार की प्रवृत्ति है, वहीँ परमात्मा से मिलन भी है।

Thursday, 23 November 2017

जिंदगी में कुछ भी आपका नहीं..किसी न किसी की अमानत है..

मार्गदर्शक चिंतन-

इस दुनिया में जो कुछ भी आपके पास है, वह बतौर अमानत ही है और दूसरे की अमानत का भला गुरुर कैसा ? बेटा बहु की अमानत है, बेटी दामाद की अमानत है, शरीर शमशान की अमानत है और जिन्दगी मौत की अमानत है।
अमानत को अपना समझना सरासर बेईमानी ही है। याद रखना यहाँ कोई किसी का नहीं। तुम चाहो तो लाख पकड़ने की कोशिश कर लो मगर यहाँ आपकी मुट्ठी में कुछ आने वाला नहीं है। अमानत की सार-सम्भाल तो करना मगर उसे अपना समझने की भूल मत करना और जो सचमुच तुम्हारा अपना है, इस दुनियां की चमक - दमक में उसे भी मत भूल जाना।
यह सच है कि इस दुनिया में कोई तुम्हारा अपना नहीं मगर दुनिया बनाने वाला जरुर अपना है फिर उस अपने से प्रेम न करना बेईमानी नहीं तो और क्या है।

Wednesday, 22 November 2017

कहां मिलेंगे परमात्मा..

मार्गदर्शक चिंतन-

दीन दुखियों की सेवा करो और पड़ोसियों से प्रेम, ताकि आपको परमात्मा को ढूँढने कहीं दूर न जाना पड़े। यह अनमोल वचन हमें बहुत कुछ सन्देश दे जाते हैं बशर्ते हम समझने का प्रयास करें। हमारे जीवन की विचित्रिता तो देखिये ! हम तीर्थ स्नान के लिए कोसों दूर जाते हैं और पड़ोस का कोई दुखियारा केवल इस कारण मर गया कि उसे एक घूँट जल की न मिल सकी।
हम बड़े-बड़े भंडारे लगाने मीलों दूर जाते हैं और मुहल्लों के कई किशोर पढने- लिखने की उम्र में सिर्फ इसलिए अमानवीय व्यवहार सहकर भी रात- दिन मजदूरी करते हैं ताकि उनके परिवार को कम से कम एक वक्त तो भर पेट भोजन मिल सके।
काश ! अब भी इस समाज में कोई एकनाथ और नामदेव जैसे चैतन्य पुरुष प्रकट होते, जिन्हें पशु में ही पशुपति नाथ और कुत्ते में ही कुल देव के दर्शन हो गये।

Tuesday, 21 November 2017

कैसा हो जीवन जीने का मार्ग..

मार्गदर्शक चिंतन-

? जीवन में पद से ज्यादा महत्व पथ का है। इसलिए पदच्युत हो जाना मगर भूलकर भी कभी पथच्युत मत हो जाना। पथच्युत हो जाना अर्थात उस पथ का त्याग कर देना जो हमें सत्य और नीति के मार्ग से जीवन की ऊंचाईयों तक ले जाता है।
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पथच्युत होने का अर्थ है, जीवन की असीम संभावनाओं की ओर बढ़ते हुए क़दमों का विषय- वासनाओं की दलदल में फँस जाना। महान लक्ष्य के अभाव में जीना केवल प्रभु द्वारा प्राप्त इस मनुष्य देह का निरादर ही है और कुछ नहीं।
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महानता के द्वार का रास्ता मानवता से होकर ही गुजरता है। मानवता की सेवा ही सबसे बड़ा धर्मं और उपासना है। मानवता रुपी पथ का परित्याग ही तो पथच्युत हो जाना है।

Monday, 20 November 2017

जानिए कैसा धन जीवन में देगा लाभ..

मार्गदर्शक चिंतन-

धन तो सभी कमाते हैं मगर जो लोग धन के अर्जन में पवित्रता, धन के रक्षण में अनासक्ति, उपयोग में संयम और विवेक रखते हैं। शास्त्रों की दृष्टि में उन्ही का धनार्जन सार्थक माना गया है।
अगर धन कमाने में नैतिकता और पवित्रता का ध्यान रखा जाता है तो फिर सच समझना यह आपके जीवन को कभी भी अनैतिक नहीं होने देगा। इसी प्रकार अगर कमाए गये धन में आसक्ति भाव छोडकर उसका रक्षण किया जाए तो समझ लेना फिर आपकी कीर्ति और यश को फैलने से रोकना किसी के भी सामर्थ्य में नहीं।
साथ ही धन का उपयोग यदि विवेकपूर्ण संयम से किया जाए तो फिर निश्चित ही आपका धन ही सार्थक नहीं हो जाता अपितु सम्पूर्ण जीवन भी सार्थक हो जाता है।