Tuesday, 8 August 2017

कैसे बनाए जीवन को आनंदमय..

मार्गदर्शक चिंतन-

जीवन प्रसन्नता और आनन्द से जिया जा सकता है लेकिन देखा जाए तो लोग अकारण अपने स्वभाव और व्यवहार से इसे अशांत और क्लेशमय बना रहे हैं। छोटी - छोटी बातें जिनको प्रेमपूर्ण तरीके से सुलझाया जाया सकता है उन्हें अहम की बजह से लोग और अधिक उलझा देते हैं।
धैर्य का तो लगता है जैसे लोगों में अकाल सा आ गया हो। जबकि जीवन में धैर्य नाम का सदगुण नहीं है तो पल-पल इंसान का स्वयं तो परेशानी में बीतता है अपितु वह सम्पूर्ण वातावरण को भी परेशान सा कर देता है। 
आप स्थिति- परिस्थिति को नहीं बदल सकते हो लेकिन अपनी प्रतिक्रिया को जरूर बदल सकते हो। आपकी प्रतिक्रिया गीत के रूप में भी हो सकती है और गाली के रूप में भी, यह तो आपके ऊपर ही निर्भर है। बिचार करें, कहीं आप भी तो अज्ञानवश अकारण क्लेशों को तो जन्म नहीं दे रहे हो ?

Monday, 7 August 2017

जानिए मानव जीवन का महत्व..

मार्गदर्शक चिंतन-

जीवन बड़ा अनंत है, कुछ भी तो ऐसा नहीं जो प्राप्त ना किया जा सके। प्रत्येक जीवन ईश्वर की अनुपम देन और कृपा प्रसाद है। 
यहाँ हर कोई साधारण से असाधारण होने की पात्रता रखता है। यहाँ अनेकों ऐसे उदाहरण है जिन्होंने शून्य से यात्रा प्रारम्भ की और फिर शिखर तक जा पहुंचे। उन्हें भगवान ने कोई अलग से शक्ति नहीं दी ये सब करने के लिए। परन्तु वो प्रत्येक क्षण अपने उद्देश्य में सतत संलग्न रहे।
मानव जीवन अपने आप में बड़ा शक्ति संपन्न है। आवश्यकता है स्वयं की शक्तियों को पहचानने की, एक दृण संकल्प की, एक जूनून की। नकारात्मक बिचारों को त्यागकर अपने लक्ष्य पर ध्यान केंद्रित करो। देखो सफलता तुम्हारा आलिंगन करने को तैयार खड़ी है।

Sunday, 6 August 2017

क्या है मनुष्य और पशु में अंतर..

मार्गदर्शक चिंतन-

एक ही फर्क है जो इंसान और पशु में अंतर पैदा करता है वो है विवेक। देखा जाये तो विवेक ही व्यक्ति को पशु बनने से रोकता है। विवेकवान व्यक्ति ही जीवन की प्रत्येक परिस्थिति, वस्तु, व्यक्ति, अवस्था इन सबको अपने अनुकूल कर सकता है।
जिस प्रकार बाढ़ जब आती है तो वह सब कुछ बहा ले जाती है। लेकिन एक कुशल तैराक अपनी तैरने की कला से बाढ़ को भी मात देकर स्वयं तो बचता ही है अपितु कई औरों के जीवन को भी बचाने में सहायक होता है। 
तुम संसार की भीड़ का हिस्सा मत बनो। परिस्थिति और अभावों का रोना तो सब रो रहे हैं। तुम कुछ अलग करो, अच्छा करो, प्रसन्न होकर करो। विवेक इसीलिए तो है तुम गिरने से बच सको। ये जरूर ध्यान रखना विवेकयुक्त होकर काम करते हो तभी तक तुम इंसान हो।

Saturday, 5 August 2017

जानिए कहां मिलेगी प्रसन्नता..

मार्गदर्शक चिंतन-

प्रसन्नता कोई तुम्हें नहीं दे सकता, ना ही बाजार में किसी दुकान पर जाकर पैसे देकर आप खरीद सकते हैं। अगर पैसे से प्रसन्नता मिलती तो दुनिया के सारे अमीर खरीद लेते।
प्रसन्नता जीवन जीने के ढंग से आती है। जिंदगी भले ही खूबसूरत हो लेकिन जीने का अंदाज खूबसूरत ना हो तो जिंदगी को बदसूरत होते देर नहीं लगती। झोंपड़ी में भी कोई आदमी आनन्द से लबालब मिल सकता है और कोठियों में भी दुखी, अशांत, परेशान आदमी मिल जायेगा।
आज से ही सोचने का ढंग बदल लो जिंदगी उत्सव बन जायेगी। स्मरण रखना संसार जुड़ता है त्याग से और बिखरता है स्वार्थ से। त्याग के मार्ग पर चलोगे तो सबका अनुराग बिना माँगे ही मिलेगा और जीवन बाग़ बनता चला जायेगा।

Thursday, 3 August 2017

कैसे होगा मन पवित्र..

मार्गदर्शक चिंतन-

व्यक्ति का मन खाली नहीं रह सकता। वह शुभ-अशुभ कुछ ना कुछ चिन्तन जरूर करता रहेगा। वसुदेव चिन्तन नहीं करेगा तो विषय चिन्तन करेगा। प्रभु चिन्तन से मोह की निवृत्ति हो जाती है। ईश्वर चिन्तन से मन पवित्र होता है।
ज्यादा विषय भोग के चिन्तन से इन्हें प्राप्त करने की तीव्र इच्छा प्रगट हो जाती है और प्राप्त ना होने पर मन अशान्त और परेशान हो जाता है। विषयोपभोग से वुद्धि जड़ हो जाती है। जड़ वुद्धि में शुभ संकल्प प्रगट, शुभ बिचार जन्म नहीँ ले पाते।
मनुष्य पहले बिचार करता है और अपने विवेकानुसार उसे करने की योजना बनाता है। संकल्पानुसार हाथ पैर सब करने को तैयार होते है। यहाँ से पाप और पुण्य दोनों हो सकते हैं। जीवन को आनंदमय बनाने के लिए जरुरी है मन को ज्यादा से ज्यादा सत्य, संत, और सत्साहित्य के आश्रय में लगाया जाए ताकि मन को गलत जगह पर जाने के अवसर ही प्राप्त ना हों।

Wednesday, 2 August 2017

जानिए सत्संग का लाभ..

मार्गदर्शक चिंतन-

संगति का बहुत जल्दी असर होता है। हमेशा तमोगुण और रजोगुण में रहने वाला व्यक्ति भी थोड़ी देर आकर सत्संग में बैठ जाये तो उसमें भी सकारात्मक और सात्विक ऊर्जा का संचार होने लगेगा। 
चेतना एक गति है। वह पूरे दिन बहती रहती है। उसे जैसा माहौल मिलेगा वह उसी में ढलने के लिए तैयार होने लगती हैं। आदमी पूरे दिन बदल रहा है। अच्छे आदमी से मिलकर अच्छे होने का सोचने लगता है तो बुरे आदमी से मिलकर बुरे होने के बिचार आने लगते हैं।
मन भिखारी की तरह है यह पूरे दिन भटकता रहता है। इसे सात्विक ही बने रहने देना। रजोगुण बढ़ा तो लोभ बढ़ेगा और लोभ बढ़ा तो ज्यादा भाग दौड़ होगी। ज्यादा दौड़ने से अशांति तो फिर आएगी ही आएगी।

Tuesday, 1 August 2017

हर व्यक्ति और वस्तु के गुणों को पहचानें..

मार्गदर्शक चिंतन-

अग्नि चाहे दीपक की हो, चिराग की हो अथवा मोमबत्ती की लौ से हो, इसके दो ही कार्य है जलना और प्रकाश करना। यह हमारे विवेक के ऊपर निर्भर करता है कि हम इसका कहाँ उपयोग करें। 
यही लौ मनुष्य के शरीर को शांत भी कर देती है, यही लौ अन्धकार को दूर कर सम्पूर्ण जगत को प्रकाशमय कर देती है। चिन्तन की बात यह है कि उपयोग करने के ऊपर निर्भर है वो उसी वस्तु से पुण्यार्जन कर सकता है तो थोड़ी चुक होने पर पापार्जन भी कर सकता है।
संसार में किसी भी वस्तु को, व्यक्ति को, स्थिति को कोसने की आवश्यकता नही है। जरुरत है उसका गुण, स्वभाव और प्रकृति समझकर समाज के हित में उपयोग करने की। दुनिया बड़ी खूबसूरत है इसे अपने विवेक, चिन्तन और शुभ आचरण से और अधिक सुन्दर बनाया जाए, यही सच्चा यज्ञ होगा।